Thursday, April 23, 2009

संभावनाओं की आहट!

कौन है वहां
मेरे अस्तित्व की परछाईयों में
मेरे अतीत को तलाशता
जैसे ले आया हो कोर्ट का वॉरंट
ले रहा हो जैसे करती है तलाशी पुलिस।
मेरे जहन में आया है
पूरब की ठंडी बयार सी
मेरा वर्त्तमान
कहाँ है मेरा अतीत
मुझे जहाँ तक याद है
वह पिछली बारिश में गीला हो गया था
फिर पोंछ कर हाथो से मैं
उसे लपेट कर पुराने अख़बार में
भूल हया था मैं इतने बरसों से।
तो क्यों मैं इस कदर परेशां हूँ?
क्यूँ मुझे कुछ होने का आभास सा हो रहा है?
क्यूँ लग रहा है जैसे एक अभिसारिका सी
उस कोने में कुछ खोज रही है? क्या हो सकती है वह चीज़?
मेरी खोई हुई कोई कहानी
या फिर तुम सी अप्रतिम कोई कविता
क्या जानू मैं ?

1 comment:

  1. नमस्कार,
    इसे आप हमारी टिप्पणी समझें या फिर स्वार्थ। यह एक रचनात्मक ब्लाग शब्दकार के लिए किया जा रहा प्रचार है। इस बहाने आपकी लेखन क्षमता से भी परिचित हो सके। हम आपसे आशा करते हैं कि आप इस बात को अन्यथा नहीं लेंगे कि हमने आपकी पोस्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।
    आपसे अनुरोध है कि आप एक बार रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को देखे। यदि आपको ऐसा लगे कि इस ब्लाग में अपनी रचनायें प्रकाशित कर सहयोग प्रदान करना चाहिए तो आप अवश्य ही रचनायें प्रेषित करें। आपके ऐसा करने से हमें असीम प्रसन्नता होगी तथा जो कदम अकेले उठाया है उसे आप सब लोगों का सहयोग मिलने से बल मिलेगा साथ ही हमें भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। रचनायें आप shabdkar@gmail.com पर भेजिएगा।
    सहयोग करने के लिए अग्रिम आभार।
    कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
    शब्दकार
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

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